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हिन्दी शायरी | दो लाइन हिन्दी शायरी | हिन्दी लव शायरी

हैलो दोस्तों ! आज आप यहाँ पर हिन्दी शायरी पढ़ सकते हैं। मैं आपके लिए आज हिन्दी लव शायरी ले कर आया हूँ। हम यहाँ हिन्दी भाषा मे हिन्दी शायरी शेयर करते है आपको इस ब्लॉग पर रोज़ाना हिन्दी शायरियाँ पढ़ने को मिल सकती है। इस ब्लॉग को बूकमार्क कर ले ताकि आपको आगे भी हिन्दी मे शायरियाँ पढ़ने को मिलती रहे।

दो लाइन लव शायरी | हिन्दी शायरी

बहुत अंदर तक जला देती हैं वह शिकायतें
जो बयान नहीं होती।

जिंदगी में सिर्फ़ दो ही नशा करना ऐ दोस्त
जीने के लिए यार और मरने के लिये प्यार।

नाराज़ होएँ भी तो किससे
ख़ुद ही ख़ुद को मना नहीं पाते आजकल।

अकेले हम ही शामिल नहीं है जुर्म में
नजरें जब भी मिली थी मुस्कुरायेँ तुम भी थे।

फरेब के इस बाज़ार में
झूठ की ख़रीदार में सच्चाई खड़ी है कतार में।

सफर कितना मुश्किल ही सही, मंज़िल अभी दूर ही सही।
हासिल करना है अपना लक्ष्य, ये ज़ज़्बा कोई कम तो नहीं।।

तुम्हारा बेइंतहा प्यार
तपते हुए रेगिस्तान में पहली बारिश की फुहार।

गम के समंदर में बहते रहे, किनारे की आस में डुबकिया लगाते रहे।
हाथ थामेगा ऐ खुदा तू एक दिन, ये विश्वास दिल में जगाते रहे।।

बहुत दिया है हमने भी घर के गुलदस्तों को पानी
पर कमबख़्त तेरी छुंवन को वो आज भी नहीं भूले।

मुझे रंग दे न सुरूर दे मेरे दिल में ख़ुद को उतार दे
मेरे लफ़्ज़ सारे महक उठे मुझे ऐसी कोई बहार दे।

धरती के चाँद में दाग होगा
पर मेरा चाँद बेदाग है।

परिंदे शुक्रगुजार हैं पतझड़ के भी दोस्तो
तिनके कहां से लाते, अगर सदा बहार रहती।

तेरे होने का जिसमें क़िस्सा है
वो ही मेरी ज़िंदगी का बेहतरीन हिस्सा है।

अरमान बहुत हैं इस दिल में कहने के लिये
मगर अब दिल को चुप रहना ही अच्छा लगता है।

साहिब इज्जत हो तो इश्क़ ज़रा सोच कर करना
ये इश्क अक्सर मुकाम-ए-जिल्लत पे ले जाता है।

हिन्दी शायरी | हिन्दी लव शायरी

यूँ ही नही कोई शायरी करा करते हैं
शायरी बताती हैं कहीँ दिल हमने भी लगाया था।

वो हवाओं में उसके पैरों के निशान ढूंढता है
हर फूल में उस तितली के रंगो की पहचान ढूँढता है।

दुआ कोन सी थी हमें याद नहीं
बस इतना याद है दो हथेलियाँ जुड़ी थी एक तेरी थी एक मेरी थी।

इतने भी कौन से नख़रे हैं हमारे
कि हम ही हमको अब महँगे पड़ने लगे हैं।

लेहजा कि जेसें सुबह की मिठ्ठी आवाज़ दे
जी चाहता है मै तेरी आवाज चूम लुं।

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं
चल ना कुछ शायरी पढ़ते हैं।

अगर है गहराई तो चल डूबा दे मुझ को
शराब नाकाम रही अब तेरी आँखो की बारी है।

वही शख़्स मेरे लश्कर से बगावत कर गया
जीत कर सल्तनत जिसके नाम करनी थी।

ज़िन्दगी मैं दो हि लफ्ज खुबसूरत है
एक  मेरा  कहना आइ लव यू और एक तेरा कहना आइ लव यू टु।

मज़ाक ही सही एक बात दिल से तो बताओ
वाक़ई में बिजी रहते हो या याद करने के काबिल नही हम।

ज़िन्दगी की हकीकत को बस इतना ही जाना है
दर्द में अकेले हैं और ख़ुशियों में सारा जमाना है।

यह भी एक जमाना देख लिया हमने
दर्द जो सुनाया अपना तो महफ़िल में तालियां गूंजी।

जज़्बात कहते हैं ख़ामोशी से बसर हो जाए
धड़कनो की जिद्द है दुनिया को खबर हो जाएं।

घर अंदर ही अंदर टूट जाते हैं
मकान खड़े रहते हैं बेशर्मो की तरह।

नज़र से “नज़र” मिलाकर तुम “नज़र” लगा गए।
ये कैसी लगी “नज़र” की हम हर “नज़र” में आ गए।।

बिखरी पड़ी थी ज़िन्दगी लफ़्ज़ों में जैसे
तुम आए ज़िन्दगी में तो एक मुकम्मल नज़्म हो गई।

लव शायरी | हिन्दी लव शायरी

लोगो ने मेरी इतनी कमियां निकाल दी की
खूबियों के सिवाए मेरे पास कुछ बचा ही नहीं।

हम जिसे छिपाते फिरते हैं उम्रभर वही बात बोल देती है
शायरी भी क्या गजब होती है हर राज खोल देती है।

मंज़िल-ए-सुकूँ का पता ढूँढते हैं।
जिन सड़कों पे खो जाएँ वो राह ढूँढते हैं।।

मिरे अज़ीज़ ही मुझ को समझ न पाए कभी
मैं अपना हाल किसी अजनबी से क्या कहता।

बिछड़ा कुछ इस अदा से की रूत ही बदल गयी
एक शख़्स सारे शहर को विरान कर गया।

मिरे अज़ीज़ ही मुझ को समझ न पाए कभी
मैं अपना हाल किसी अजनबी से क्या कहता।

तुम आंसू को महज़ आंसू ना समझो
हर आंसू में एक हसरत निकलती है।

एक अजीब सी जंग है मुझमें
कोई मुझसे ही तंग है मुझमें।

मुंह की बात सुने ना कोई दिल के दर्द को जाने कौन
आवाज़ों के बाजार में खामोशी पहचाने कौन।

अब से ख़ामोशियाँ ही बेहतर हैं।
शब्दों से लोग आजकल रूठते बहुत हैं।।

अगर मिल जाती सबको अपनी मोहब्बत की मंजिल
तो फिर इन रात के अंधेरो में शायरी करता कौन।

सबके कर्ज़े चुका दूं मरने से पहले ऐसी मेरी नियतं हैं
मौत से पहले तूं भी बता दे ज़िदगी तेरी क्या किमत हैं।

जब से मेरी शायरी में तुम आने लगी हो।
तब से मेरा हुनर और भी निखरने लगा है।।

हिन्दी शायरी | दो लाइन हिन्दी शायरी

आखिर क्यों रिश्तो की गलियां इतनी तंग हैं
शुरुआत कौन करे यही सोच कर बात बंद है।

वो जो उस पार हैं इस पार मुझे जानते हैं।
ये जो इस पार हैं उस पार समझते हैं मुझे।।

कभी मेरी शायरी पसंद ना आए तो बता देना दोस्त
हम महफिल से तुम्हें उडा देंगे बड़े आए नापसंद करने वाले।

कभी-कभी सोचती हूं मेरे बारे में सोचता होगा वो
फिर सोचती हूं मैं भी क्या क्या सोचती रहती हूं।

शिकायतों की पाई-पाई जोड़कर रखी थी मैंने
उनकी दो बूंद आंसूओं ने सारा हिसाब बिगाड़ दिया।

लगी है प्यास चलो रेत निचोड़ी जाए
अपने हिस्से में समंदर नहीं आने वाला।

हमने चाहा था इक ऐसे शख्स को
जो आइने से भी नाजुक था मगर था पत्थर का।

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